UPSSSC लोअर मेन्स के लिए शब्द युग्मों का अर्थ भेद की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका। UPSSSC लोअर मेन्स के लिए शब्द युग्मों का अर्थ भेद की व्यापक अध्ययन मार्गदर्शिका।
| शब्द युग्म | अर्थ (प्रथम) | अर्थ (द्वितीय) |
|---|---|---|
| अनल-अनिल | अग्नि | वायु |
| अंश-अंश | भाग | कंधा |
| कुल-कूल | वंश | किनारा |
| तरणि-तरणी | सूर्य | नाव |
| प्रसाद-प्रासाद | कृपा | महल |
हिंदी भाषा में वे शब्द जो सुनने में लगभग समान प्रतीत होते हैं, लेकिन उनका अर्थ पूरी तरह से भिन्न होता है, उन्हें 'शब्द युग्म' या 'श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द' कहा जाता है।हिंदी भाषा में वे शब्द जो सुनने में लगभग समान प्रतीत होते हैं, लेकिन उनका अर्थ पूरी तरह से भिन्न होता है, उन्हें 'शब्द युग्म' या 'श्रुतिसम भिन्नार्थक शब्द' कहा जाता है।
1. मात्राओं का सूक्ष्म अंतर: इ/ई, उ/ऊ की मात्रा अर्थ बदल देती है। 2. वर्णों का भ्रम: श/स, ण/न का अंतर।1. मात्राओं का सूक्ष्म अंतर: इ/ई, उ/ऊ की मात्रा अर्थ बदल देती है। 2. वर्णों का भ्रम: श/स, ण/न का अंतर।
अतुल-अतुलनीय, अनल-आग, अनिल-हवा, अवलंब-सहारा, अविलंब-शीघ्र, आदि-आरंभ, आदि-अभ्यस्त, इत्र-सुगंध, इतर-दूसरा, उपकार-भलाई, अपकार-बुराई, कपी-बंदर, कपि-घिरनी, कृपण-कंजूस, कृपाण-तलवार, गज-हाथी, गज़-माप, जरा-बुढ़ापा, ज़रा-थोड़ा, जलद-बादल।अतुल-अतुलनीय, अनल-आग, अनिल-हवा, अवलंब-सहारा, अविलंब-शीघ्र, आदि-आरंभ, आदि-अभ्यस्त, इत्र-सुगंध, इतर-दूसरा, उपकार-भलाई, अपकार-बुराई, कपी-बंदर, कपि-घिरनी, कृपण-कंजूस, कृपाण-तलवार, गज-हाथी, गज़-माप, जरा-बुढ़ापा, ज़रा-थोड़ा, जलद-बादल।
जलधि-समुद्र, तरु-पेड़, तरणी-सूर्य, दशन-दांत, दसन-काटना, नियत-निश्चित, नीयत-इरादा, निर्झर-झरना, निर्जर-देवता, परुष-कठोर, पुरुष-आदमी, बदन-शरीर, वदन-मुख, भवन-घर, भुवन-संसार, मरीचि-किरण, मरीची-सूर्य, रंक-गरीब, रंग-वर्ण, लक्ष्य-उद्देश्य।जलधि-समुद्र, तरु-पेड़, तरणी-सूर्य, दशन-दांत, दसन-काटना, नियत-निश्चित, नीयत-इरादा, निर्झर-झरना, निर्जर-देवता, परुष-कठोर, पुरुष-आदमी, बदन-शरीर, वदन-मुख, भवन-घर, भुवन-संसार, मरीचि-किरण, मरीची-सूर्य, रंक-गरीब, रंग-वर्ण, लक्ष्य-उद्देश्य।
लक्षण-चिह्न, वसन-कपड़ा, व्यसन-आदत, शंकर-शिव, शंकर-मिश्रित, शुचि-पवित्र, सूची-तालिका, शोक-दुख, शॉक-झटका, सती-पवित्र स्त्री, शती-सौ वर्ष, सर-बाण, सर-तालाब, सुत-पुत्र, सूत-धागा, सुर-देवता, सूर-अंधा, हस-हंसना, हंस-पक्षी, हेतु-कारण।लक्षण-चिह्न, वसन-कपड़ा, व्यसन-आदत, शंकर-शिव, शंकर-मिश्रित, शुचि-पवित्र, सूची-तालिका, शोक-दुख, शॉक-झटका, सती-पवित्र स्त्री, शती-सौ वर्ष, सर-बाण, सर-तालाब, सुत-पुत्र, सूत-धागा, सुर-देवता, सूर-अंधा, हस-हंसना, हंस-पक्षी, हेतु-कारण।
1. मात्राओं पर विशेष ध्यान दें: छोटी मात्रा (इ, उ) अक्सर छोटे या मूल अर्थ को दर्शाती है। 2. उच्चारण अभ्यास: शब्दों को जोर से बोलकर अंतर पहचानें। 3. 'नुकता' का महत्व: ज़ (जरा-थोड़ा) और ज (जरा-बुढ़ापा) में अंतर पहचानें। 4. वाक्य प्रयोग: यदि शब्द का अर्थ न पता हो, तो उसे वाक्य में प्रयोग करके देखें।1. मात्राओं पर विशेष ध्यान दें: छोटी मात्रा (इ, उ) अक्सर छोटे या मूल अर्थ को दर्शाती है। 2. उच्चारण अभ्यास: शब्दों को जोर से बोलकर अंतर पहचानें। 3. 'नुकता' का महत्व: ज़ (जरा-थोड़ा) और ज (जरा-बुढ़ापा) में अंतर पहचानें। 4. वाक्य प्रयोग: यदि शब्द का अर्थ न पता हो, तो उसे वाक्य में प्रयोग करके देखें।